23rd March 1931
उस दौर ए जहाँ कि बात कुछ और थी।
अाज हालात कुछ और है।
लोग पहले वतन पे मिटते थे,
आज मिटाने में लगे हैं।
पर ये वक्त है,
और वक्त कहा ठहरा है,
फिर से भगत सिंह होंगे।
फिर से इंकलाब होगा ।
उस दौर ए जहाँ कि बात कुछ और थी।
अाज हालात कुछ और है।
लोग पहले वतन पे मिटते थे,
आज मिटाने में लगे हैं।
पर ये वक्त है,
और वक्त कहा ठहरा है,
फिर से भगत सिंह होंगे।
फिर से इंकलाब होगा ।
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