ऐक युगांक बीत गया , ऐक सदी हुई पराई !
कितने सत्य असत्य , कितने उत्थान पतन ,
खुद में संजो , ले ली विदाई !!
डूब गई ऐक संध्या श्यामल , सहर नई एक आई !
गुजरा दिन और हुआ अँधेरा,
फिर एक लौ टिमटिमाई !!
घर के भीतर सोया बचपन , भूले नानी कि कहानी !
एक बच्चा अब बड़ा गया ,
खोई एक भोली शैतानी !!
सागर में तूफान उठा एक , लहरो ने ली अंगड़ाई ,
दूर कही एक मुसाफिर ने ,
फिर अपनी प्यास बुझाई !!
मिट्टी ने लहराया आँचल , बूंदो से भीगी मैं शरमाई !
आसमान छूने को मैंने ,
बाहें दोनों फैलाई !!
माँ ने दि दुआ दिल से, वही सबसे बड़ी खुदाई !
राम दिखे मस्जिद में मुझको ,
मंदिर में दिए रहीम दिखाई !!
जाती पाती और धर्म, छेत्र एक हैं , मानवता कि एक लड़ाई !
सब बंधन हैं नाम के बंधन ,
उनका प्यार ही हैं सच्चाई !!

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