Saturday, 8 March 2014

ऐक युगांक बीत गया ..



ऐक युगांक  बीत गया , ऐक  सदी हुई पराई !
कितने  सत्य  असत्य , कितने  उत्थान  पतन ,
खुद  में संजो , ले ली विदाई !!

डूब गई ऐक संध्या श्यामल , सहर नई  एक आई  !
गुजरा दिन और हुआ अँधेरा,
फिर एक  लौ  टिमटिमाई !!

घर  के   भीतर सोया बचपन , भूले नानी कि कहानी !
एक बच्चा अब बड़ा गया ,
खोई एक भोली शैतानी !!

सागर में तूफान उठा एक , लहरो ने ली अंगड़ाई ,
दूर कही एक मुसाफिर ने ,
फिर अपनी प्यास बुझाई !!

मिट्टी ने लहराया आँचल , बूंदो से भीगी मैं शरमाई !
आसमान छूने को मैंने ,
बाहें दोनों फैलाई !!

 माँ ने दि दुआ दिल से, वही सबसे बड़ी खुदाई !
राम दिखे  मस्जिद में मुझको ,
मंदिर में दिए  रहीम दिखाई !!

जाती पाती और धर्म, छेत्र एक हैं  , मानवता  कि एक लड़ाई !
सब बंधन हैं नाम के बंधन ,
उनका प्यार ही हैं सच्चाई !!



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